किसानो को क़र्ज़े से मुक्ती पानी होगी.व अपना हर रू अपनी जेब से नक़द खरच करना होगा.ज्यादा मजबूरी है तो बैंक से लोन लेना ही ठीक है.करीब हर किसान उधार लेकर घी पीता है व भारी ब्याज चुकाता है.यह कैसी नासमझी है!कुछ भी उधार लेने पर उसे महँगे दाम पर समान ख़रीदना पड़ता है. by समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब,

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