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टिटहरी की चीखों से ट्रेक्टर नहीं रुका करते।यह तो किसान की इंसानियत होती है कि अंडों के इर्द-गिर्द आधा बीघा जमीन खाली छोड़ देता है।इसको वकील अपने पे ले या मी लार्ड,क्या फर्क पड़ता है!किसानों के बच्चे तो रोडसाइड बैठकर ही शिक्षा प्राप्त कर लेते है चाहे तुम फसल मारने का धंधा करो या नश्ल।स्कूलें मारी जा सकती है किसानों के बच्चों का हौंसला व समझ नहीं। By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब किसान_एकता_जिंदाबाद,
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